महाशिवरात्रि 2026: विशेष मुहूर्त

 महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान, आत्म-संयम और शिव-शक्ति के मिलन का उत्सव है।

महाशिवरात्रि का महत्व (Significance)
'महाशिवरात्रि' का अर्थ है "शिव की महान रात"। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। आध्यात्मिक दृष्टि से माना जाता है कि इस रात ब्रह्मांड का उत्तरी गोलार्ध इस तरह स्थित होता है कि मनुष्य के भीतर की ऊर्जा स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर बढ़ती है। इसलिए, इस रात रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर जागने का विशेष महत्व है।



पौराणिक कथाएँ और मान्यताएँ
महाशिवरात्रि से जुड़ी कई प्रमुख कथाएँ प्रचलित हैं:
  1. शिव-पार्वती विवाह: सबसे लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यह वैराग्य और गृहस्थ जीवन के मिलन का प्रतीक है।
  2. समुद्र मंथन (नीलकंठ): जब समुद्र मंथन से विष निकला, तो ब्रह्मांड को बचाने के लिए शिव ने उसे पी लिया। विष को गले में रोकने के कारण उनका गला नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। देवताओं ने विष के प्रभाव को कम करने के लिए रात भर शिव की स्तुति की थी।
  3. लिंगोद्भव: मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव पहली बार 'ज्योतिर्लिंग' के रूप में प्रकट हुए थे, जिसका न आदि था और न अंत।

व्रत और पूजा विधि (Rituals)
महाशिवरात्रि का व्रत आत्म-शुद्धि का मार्ग है। भक्त इस दिन निम्नलिखित अनुष्ठान करते हैं:
  • जलाभिषेक और रुद्राभिषेक: शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और घी चढ़ाया जाता है।
  • बेलपत्र का अर्पण: भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं' के अनुसार, तीन पत्तियों वाला बेलपत्र सत्व, रज और तम गुणों के नियंत्रण का प्रतीक है।
  • रात्रि जागरण (Jagran): रात के चार प्रहरों में शिव की विशेष पूजा की जाती है। भक्त रात भर भजन-कीर्तन और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हैं।
  • उपवास (Vrat): कई श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार (फल और दूध) का सेवन करते हैं।

महाशिवरात्रि 2026: विशेष मुहूर्त (Timings in India)
2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी (रविवार) को मनाई जाएगी।
  • निशिता काल पूजा (अर्धरात्रि): 16 फरवरी, 12:09 AM से 01:01 AM
  • पारण का समय: 16 फरवरी को सुबह 06:33 AM के बाद

प्रमुख स्थल और उत्सव
भारत के कोने-कोने में इसे अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है:
  • उज्जैन (महाकालेश्वर): यहाँ 'शिव नवरात्रि' मनाई जाती है और बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार होता है।
  • वाराणसी (काशी विश्वनाथ): काशी में 'शिव की बारात' निकाली जाती है जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं।
  • ईशा योग केंद्र (Coimbatore): यहाँ सद्गुरु के सानिध्य में विश्व प्रसिद्ध महाशिवरात्रि उत्सव होता है, जिसमें संगीत और ध्यान का समागम होता है।

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